" हिन्दी काव्य संकलन में आपका स्वागत है "


"इसे समृद्ध करने में अपना सहयोग दें"

सन्देश

मुद्दतें गुज़री तेरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गये हों तुझे ऐसा भी नहीं
हिन्दी काव्य संकलन में उपल्ब्ध सभी रचनायें उन सभी रचनाकारों/ कवियों के नाम से ही प्रकाशित की गयी है। मेरा यह प्रयास सभी रचनाकारों को अधिक प्रसिद्धि प्रदान करना है न की अपनी। इन महान साहित्यकारों की कृतियाँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना ही इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी रचनाकार अथवा वैध स्वामित्व वाले व्यक्ति को "हिन्दी काव्य संकलन" के किसी रचना से कोई आपत्ति हो या कोई सलाह हो तो वह हमें मेल कर सकते हैं। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जायेगी। यदि आप अपने किसी भी रचना को इस पृष्ठ पर प्रकाशित कराना चाहते हों तो आपका स्वागत है। आप अपनी रचनाओं को मेरे दिए हुए पते पर अपने संक्षिप्त परिचय के साथ भेज सकते है या लिंक्स दे सकते हैं। इस ब्लॉग के निरंतर समृद्ध करने और त्रुटिरहित बनाने में सहयोग की अपेक्षा है। आशा है मेरा यह प्रयास पाठकों के लिए लाभकारी होगा.(rajendra651@gmail.com),00971506823693 (UAE)

समर्थक

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

अहमद हमदानी


१.

न आरजू न तमन्ना, कहाँ चले आये
थकन से चूर ये तनहा कहाँ चले आये

रुकी-रुकी सी हवाए घुटा-घुटा माहौल
ये रात-रात अँधेरा कहाँ चले आये

घरोंदा एक बनाया था हमने ख्वाबो का
गिरा के खुद वो घरोंदा कहाँ चले आये

यहाँ तो दिल को भी दुख न आ सके शायद
यहाँ का दर्द भी झूठा, कहाँ चले आये

ये एक चिराग सा जलता है आज भी दिल में
अरे हवा का ये झोंका, कहाँ चले आये
२.

अब ये होगा शायद अपनी आग में ख़ुद जल जायेंगे
तुम से दूर बहुत रहकर भी क्या खोया क्या पायेंगे

दुख भी सच्चे सुख भी सच्चे फिर भी तेरी चाहत में
हमने कितने धोके खाये कितने धोके खायेंगे

अक़्ल पे हम को नाज़ बहुत था लेकिन कब ये सोचा था
इश्क के हाथों ये भी होगा लोग हमें समझायेंगे

कल के दुख भी कौनसे बाक़ी आज के दुख भी कै दिन के
जैसे दिन पहले काटे थे ये दिन भी कट जायेंगे

हम से आबला-पा जब तन्हा घबरायेंगे सहरा में
रास्ते सब तेरे ही घर की जानिब को मुड़ जायेंगे

आंख़ों से औझल होना क्या दिल से औझल होना है
मुझसे छूट कर भी अहले ग़म क्या तुझसे छुट जायेंगे