" हिन्दी काव्य संकलन में आपका स्वागत है "


"इसे समृद्ध करने में अपना सहयोग दें"

सन्देश

मुद्दतें गुज़री तेरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गये हों तुझे ऐसा भी नहीं
हिन्दी काव्य संकलन में उपल्ब्ध सभी रचनायें उन सभी रचनाकारों/ कवियों के नाम से ही प्रकाशित की गयी है। मेरा यह प्रयास सभी रचनाकारों को अधिक प्रसिद्धि प्रदान करना है न की अपनी। इन महान साहित्यकारों की कृतियाँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना ही इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी रचनाकार अथवा वैध स्वामित्व वाले व्यक्ति को "हिन्दी काव्य संकलन" के किसी रचना से कोई आपत्ति हो या कोई सलाह हो तो वह हमें मेल कर सकते हैं। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जायेगी। यदि आप अपने किसी भी रचना को इस पृष्ठ पर प्रकाशित कराना चाहते हों तो आपका स्वागत है। आप अपनी रचनाओं को मेरे दिए हुए पते पर अपने संक्षिप्त परिचय के साथ भेज सकते है या लिंक्स दे सकते हैं। इस ब्लॉग के निरंतर समृद्ध करने और त्रुटिरहित बनाने में सहयोग की अपेक्षा है। आशा है मेरा यह प्रयास पाठकों के लिए लाभकारी होगा.(rajendra651@gmail.com),00971506823693 (UAE)

समर्थक

सोमवार, 13 मई 2013

बृजेश नीरज के दोहे

जन्म- 19-08-1966 लखनऊ, उतर प्रदेश। 
शिक्षा- एम0एड0, एल0एल0बी0, लेखन विधाएँ- छंदमुक्त, गीत, सॉनेट, 
सम्पर्क-ईमेल- brijeshkrsingh19@gmail.com,ब्लॉग- Voice of Silent Majority,(http://voice-brijesh.blogspot.com),
निवास- छितवापुर रोड, लखनऊ-226001
सम्प्रति- उ0प्र0 सरकार का कर्मचारी।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कंचन काया कामिनी, डोलत कटि ज्यों डोर।

मोहक अति मन भावनी, भ्रमर सरिस चित चोर।।

नैनन में कजरा भरे, चितवन चतुर चकोर।
इत उत खोजत फिरत है, नटखट श्याम किशोर।।


काटे से तो नहि कटी, पानी की ये धार।

छोटी सी इक बात ने, बाँटा घर संसार।।

अब तो मन बैरी भया, पिया मिलन की आस। 
बासंती मधुबन भया, बढ़ती जाए प्यास।।

टेसू, सरसों सब खिले, आंगन में मलमास।
रंग सभी फीके हुए, पिया नहीं जो पास।।

बागों में कलियां खिलीं, पेड़ सभी हरियाय।
मैं पतझड़ की बेल सी, सूखत दिन दिन जाय।

इस होली के रंग में, डूबा सब संसार।
तुम बिन सूनी मैं हुई, सूना ये घर द्वार।।