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सन्देश

मुद्दतें गुज़री तेरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गये हों तुझे ऐसा भी नहीं
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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

बृजेश नीरज के गीत

परिचय 
जन्म 19-08-1966 लखनऊ, उतर प्रदेश।
निवास- लखनऊ
शिक्षा- एम0एड0, एल0एल0बी0, लेखन विधाएँ- छंदमुक्त, गीत, सॉनेट,
ईमेल- brijeshkrsingh19@gmail.com,
ब्लॉग- Voice of Silent Majority,(http://voice-brijesh.blogspot.com),
सम्प्रति- उ0प्र0 सरकार का कर्मचारी।
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१. 

हमारी हिन्दी
नवगीत


करें हम मान अब इतना

सजा लें माथ पर बिन्दी।

बहे फिर लहर कुछ ऐसी
बढ़े इस
विश्व में हिन्दी।।

गंग सी पुण्य यह धारा
यमुन सा रंग हर गहरा
सुबह की सुखद बेला सी
धरे है
रूप ये हिन्दी।।

मधुरता शब्द, आखर में
सरसता भाव, भाषण में
रसों की धार छलके तो
करे मन
तृप्त यह हिन्दी।।

तोड़ के बॅंध दासता के
सभी भ्रम जाल भाषा के
बसा लें प्रेम अब इसका
प्रथम हो
देश में हिन्दी।।