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सन्देश

मुद्दतें गुज़री तेरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गये हों तुझे ऐसा भी नहीं
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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "



परिचय: 
नाम:- डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "
आत्मज:- पिता-श्री इंद्रजीत सिंह सोनवानी (प्रधान अध्यापक)
माता:- श्रीमती फुलेश्वरी सोनवानी
जन्म तिथि:- 25-06-1985, रायगढ़ जिले के तमनार,पड़ीगाँव ग्राम में
शिक्षा:- स्नातक(कला), स्नातकोत्तर (हिन्दी साहित्य), डी.लिट्(हिन्दी), एस.एस.डी.ए.सी.(कम्प्यूटर विज्ञान)
विधा:- कविता ,कहानी, लघुकथा , समीक्षा

पुरुस्कार:- नन्हें सम्राट - नई दिल्ली द्वारा " श्रेष्ठ मेघ काव्य पुरुस्कार "
नवभारत बिलासपुर द्वारा " श्रेष्ठ शैक्षिक व पर्यावरण काव्य पुरुस्कार "

सम्मान:- अखिल भारतीय साहित्य सम्मान , अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मान, सृजन सम्मान, उत्कृष्ट साहित्य सम्मान

प्रकाशित कृति:- नील गगन में उड़ जाऊँ ( काव्य संग्रह )
प्रकाशनार्थ कृति:- नाना जी के आँगन में ( काव्य संग्रह ),
अजब सलोना गाँव ( काव्य संग्रह )

अन्य:- अब तक देश की महत्वपूर्ण साहित्य नन्हें सम्राट,बालहंस,बालभारती,बालवाटिका,देवपुत्र , बालसाहित्य समीक्षा, बालमन, नन्हीं दुनियाँ, बालप्रहरी, बाल कल्पना कुञ्ज,साहित्य अमृत,सूत्रपात,वेब दुनियाँ,दैनिक भास्कर एवं नवभारत में शताधिक रचनाएँ प्रकाशित और आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़,रायपुर ,नागपुर , नेंट स्वर,आदिवासी स्वर एवं अम्बिकापुर से प्रसारण ।

संपर्क सूत्र :- " श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन "
मु.पो.-पड़ीगाँव, तह.-तमनार,जिला-रायगढ़ (छ.ग.)
पिन:- 496107
बातचीत:- 97547-93710
ई-मेल:- Pramod pushp10@gmail. com

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ग़ज़लें 

" मेहन्दी लगानें से पहले "
 १. 
कुछ निशानी दे अब जानें से पहले ,
चुन ले कुछ यादें भूल जानें से पहले ।
कैसे जियेंगे कुछ तदबीर बता जा ,
जी भर देख ले तस्वीर जलानें से पहले ।।1।।

तुझे भुलाना इतना आसान नहीं लगता ।
सोंच ले तू भी हाथ छुड़ाने से पहले ।।2।।

गिरे आँसू तो जमीं बंजर न बन जाये ।
पी जा अश्क आँसू गिर जानें के पहले ।।3।।

रंग गहरा हो जाये गोरे हाथों में मेरी ।
हाथों को देख मेहन्दी लगानें से पहले ।।4।।

२.

" दर्द ज्यादा है "
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प्यार का पहला अक्षर ही आधा है ,
प्यार को पानें का किसका इरादा है ।
उसे शायद नहीं मालूम त्याग है प्यार ,
कोशिश कर भूल जायेगा मेरा वादा है ।।1।।

क्यों तड़प जाता है यादों में उसके ।
समझ जायेगा तू इस खेल में नादाँ है ।।2।।

पलट-पलट कर देख चुके कई बार हमनें ।
समझना मुश्किल हर पन्नें सादा है ।।3।।

क्या कहुँ "पुष्प" रो पड़ेंगे ओ भी आज ।
कलम में स्याही कम -दर्द ज्यादा है ।।4।।

३. 

" फिर मिलेंगे कहीं "
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गुलशन खिंजा बन गई तेरे जानें के बाद ,
हम रोये बहुत तूमको भुलानें के बाद ।
तेरी आरजू रही तुझे भूल जायेंगे हम ,
तू भी रो पड़ी मेरे हाथ छुड़ाने के बाद ।।1।।

तुझे रोक न सके हम ये कैसी बेबसी थी ।
तू देखती रही मुड़ के दूर जानें के बाद ।।2।।

दिल को धड़कन से जुदा देख नहीं सकते ।
आँसू टपक पड़ा वही पलक उठानें के बाद ।।3।।

तू जिंदा रहे इन यादों के ताबीर में " पुष्प " ।
फिर मिलेंगे कहीं इस जमानें के बाद ।।4।।