" हिन्दी काव्य संकलन में आपका स्वागत है "


"इसे समृद्ध करने में अपना सहयोग दें"

सन्देश

मुद्दतें गुज़री तेरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गये हों तुझे ऐसा भी नहीं
हिन्दी काव्य संकलन में उपल्ब्ध सभी रचनायें उन सभी रचनाकारों/ कवियों के नाम से ही प्रकाशित की गयी है। मेरा यह प्रयास सभी रचनाकारों को अधिक प्रसिद्धि प्रदान करना है न की अपनी। इन महान साहित्यकारों की कृतियाँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना ही इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी रचनाकार अथवा वैध स्वामित्व वाले व्यक्ति को "हिन्दी काव्य संकलन" के किसी रचना से कोई आपत्ति हो या कोई सलाह हो तो वह हमें मेल कर सकते हैं। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जायेगी। यदि आप अपने किसी भी रचना को इस पृष्ठ पर प्रकाशित कराना चाहते हों तो आपका स्वागत है। आप अपनी रचनाओं को मेरे दिए हुए पते पर अपने संक्षिप्त परिचय के साथ भेज सकते है या लिंक्स दे सकते हैं। इस ब्लॉग के निरंतर समृद्ध करने और त्रुटिरहित बनाने में सहयोग की अपेक्षा है। आशा है मेरा यह प्रयास पाठकों के लिए लाभकारी होगा.(rajendra651@gmail.com),00971506823693 (UAE)

समर्थक

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

अज्मल अज्मली



१.

क़्ते-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ
बिखरा हुआ हयात का दफ्तर समेट लूँ
फिर जाने हम मिलें न मिलें इक ज़रा रुको
मैं दिल के आईने में ये मंज़र समेट लूँ
गैरों ने जों सुलूक किए उनका क्या गिला
फेंके हैं दोस्तों ने जों पत्थर समेट लूँ
कल जाने कैसे होंगे कहाँ होंगे घर के लोग
आंखों में एक बार भरा घर समेट लूँ
सैले-नज़र भी ग़म की तमाज़त से खुश्क हो
वो प्यास है, मिले तो समंदर समेट लूँ
'अजमल' भड़क रही है ज़माने में जितनी आग
जी चाहता है सीने के अन्दर समेट लूँ